Tuesday, May 20, 2008

बीता हुआ कल तो केवल एक स्वप्न था
आने वाला कल तो केवल मिथ्या होगी
जो भी है, केवल इस ही क्षण में है
इसी में राम का बाण है
इसी में कृष्ण की माया
इसी में है शक्ति का निवास
इसी पर है शिव का साया
यही काल है, यही महाकाल है
इसी के द्वारा बना हुआ
सृष्टि का यह मायाजाल है
यही विजय, यही पराजय
यही जीवन का संघर्ष है
इसी में प्राण, इसी में मृत्यु
इसी में बसा जीवन का मूल सत्य है
इसी पल में होगी किसी के प्राणों की आहुति स्वाहा
इसी पल में कोई हसेगा लगाकर ठहाका
बस, सम्पूर्णता है इसी एक क्षण में
साकार, निराकार, विकार, सभी कुछ यही है
मनुष्य, दानव, ईश्वर, सभी यही है
इसीलिए, हे मनुष्य, तेरे जीवन का मूल सत्य है यही
सत्य, निष्ठा और बलपूर्वक व्यतीत कर यह क्षण
जो हाथों में है तेरे अभी

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