Thursday, November 6, 2014

धन्य है नानक

जिन समझ जुग बीत गया
इक पल में यूँ समझाया
भक्ति का इक नया स्वाद
जिह्वा पे ऐसा चढ़ाया
प्रेम भावना मन में राखी
करुणा करना सिखाया
धन्य है नानक महापुरुष
के तू हम सब में आया

पढ़न गया था अक्खर को
पाठी को पाठ दिखाया
राह चलन की सीख दियो
मौलवी को राह दिखाइया
जात पात के भेदभाव को
अंकुश ऐसा लाया
धन्य है नानक महापुरुष
के तू हम सब में आया

छोड़ घर बार चला फ़क़ीर
संग चला दोस्त मरदाना
ज्ञान की धुनी रमते निशदिन
काबा भी धाम बनाया
वाहेगुरु चहुँ ओर बसे
ये चमत्कार है दिखाया
धन्य है नानक महापुरुष
के तू हम सब में आया

जा हरिद्वार जो देखियो तो
खेतों को पानी चढ़ाया
दिव्य ज्ञान के अन्तर्रहस्य
को सूरज यूँ है दिखाया
शेषनाग को कहे के जा
अब अमर हो तेरी माया
धन्य है नानक महापुरुष
के तू हम सब में आया

बैठ जहां वहाँ नित स्थान
धरम का पथ बनाया
हिन्दू मुस्लिम नर नारी
छूत अछूत मिटाया
मात पिता जहाँ अपने पूत को
गुरु का स्थान निवाया
अकाल पुरख के नाम से
करतारपुर धाम वसाइया
अन्तकाल अंगद जी को
गद्दी सौंप गुरु बनाइया
करतारपुर धाम वसाइया

काल के द्वार खड़े जब नानक
लोगन करी लड़ाइयाँ
हिन्दू के या मुस्लिम के अब
आखर रीत मनाना
नानक बोले सुनो भई साधू
सब मुझ संग फूल लगाना
जो फूलों में रहे महक
वही मेरी रीत मनाना
रात चढ़े दहुं ओर फूल
फिर करी प्रभात तैयारियां
आय सवेर जो देखे हैं
सब आंखन है भर आइय्याँ

नानक स्थान पे कछु नाहीं
बस फूल की सेज सजी है
खुशबु नानक के सुमन की
चहुँ ओर महक रही है
देखा, अंत काल में सब कुछ
ब्रह्मलीन हो जाएगा
क्या तेरा क्या मेरा सब कुछ
मिट्टी में मिल जाएगा
ज्ञान के मोती बिखराकर
यूं हम पर प्रेम लुटाया
धन्य है नानक महापुरुष
के तू हम सब में आया

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