Sunday, April 5, 2015

कल रात यहाँ चाँद आया था

कल रात यहाँ चाँद आया था
कुछ ख़्वाबों से भरके झोली
गोया ज़मीन पे उतर आया था
कल रात यहाँ चाँद आया था

यहीं राह पर उस मुसाफ़िर को
हमने गश्त लगाते देखा था
जाने किस कूचे की फ़िराक़ में
यूँ रात की गहराई में
वो अचानक चला आया था
कल रात यहाँ चाँद आया था

चंद तारों को काली बुक्कल में
उसने नगीनों से जड़ रखे थे
उस बुक्कल की टाट खड़ी कर
झोली खोल उसने अपनी
ख़्वाबों का बाज़ार लगाया था
कल रात यहाँ चाँद आया था

कुछ निराश, कुछ हताश
और कुछ सुस्तायी आँखें
उससे नींद उधार ले गये थे
कुछ यादों ने भी उसी टाट में
अपना ठिकाना बनाया था
कल रात यहाँ चाँद आया था

लम्हों की गुज़ारिश थी
की कुछ देर और कारोबार चले
पर चाँद ख़ामोश इतराया था
और बिन कोई निशां छोड़
सेहेर की अंजान राह पे उसे
हमने ग़ुम होता पाया था

कल रात यहाँ चाँद आया था
कुछ ख़्वाबों से भरके झोली
गोया ज़मीन पे उतर आया था
कल रात यहाँ चाँद आया था

No comments:

Slicing Through the Chinese High-Tech Economy Propaganda

(Courtesy: India TV) The Indian government’s decision to put 59 applications originating from the People’s Republic of China (PRC) has liter...