Friday, February 12, 2010

At last

Delhi is a strangely funny city. Let us see what happens now!!!

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मिट्टी के दीए

सरजू निराशा के बादलों से घिरा बैठा था। दीवाली की दोपहर हो गयी थी, और अभी भी सरजू के ठेले से सामान ज्यों का त्यों पड़ा हुआ था।  बड़ी आस से उसने...